जानिए काली पूजा 2025 की तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और माँ काली की कथा। इस अमावस्या पर करें शक्ति की आराधना और भय से मुक्ति प्राप्त करें।
काली पूजा, जिसे शक्ति की आराधना का महापर्व कहा जाता है, दीपावली की अमावस्या के दिन मनाई जाती है। यह दिन माँ काली — जो शक्ति, संरक्षण और न्याय की प्रतीक हैं — को समर्पित है। पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा, बिहार और उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस दिन काली माँ की पूजा बड़ी श्रद्धा से की जाती है।
“जहाँ भय समाप्त होता है, वहीं माँ काली का वास होता है।”
2025 में यह पर्व और भी विशेष होगा, क्योंकि इस वर्ष दीपावली और काली पूजा एक ही दिन पड़ रही है — जिससे यह दिन शक्ति और समृद्धि दोनों का संगम बनेगा।
काली पूजा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
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तिथि: रविवार, 20 अक्टूबर 2025
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दिन: दीपावली (अमावस्या तिथि)
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अमावस्या प्रारंभ: 20 अक्टूबर, रात 01:14 बजे
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अमावस्या समाप्त: 21 अक्टूबर, रात 03:34 बजे
काली पूजा का शुभ मुहूर्त:
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पूजन समय: रात 11:15 बजे से 12:40 बजे तक (निशीथ काल)
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प्रदोष काल पूजन: शाम 05:45 से 07:45 बजे तक
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माँ काली जप अनुष्ठान का सर्वोत्तम समय: रात्रि 12:00 से 02:00 बजे तक
यह समय तंत्र शक्ति और साधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
काली पूजा का महत्व
माँ काली, माँ दुर्गा का ही एक उग्र रूप हैं। वे अधर्म, अंधकार और भय को समाप्त कर सत्य, प्रकाश और शक्ति की स्थापना करती हैं।
काली पूजा का उद्देश्य है —
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नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति
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जीवन में साहस और आत्मबल की वृद्धि
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शत्रुओं पर विजय
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धन, ज्ञान और अध्यात्म का संतुलन
“माँ काली अंधकार का अंत हैं, और भक्ति की आरंभ।”
इस दिन, श्रद्धालु माँ काली से प्रार्थना करते हैं कि वे उनके जीवन से सभी भय और बुराइयाँ दूर करें।
काली पूजा के लिए आवश्यक सामग्री
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माँ काली की मूर्ति या चित्र
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लाल या काले कपड़े
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काली सिंदूर (काजल)
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नींबू माला (11 या 21 नींबू की)
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चावल, हल्दी, कुमकुम
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लाल फूल (गेंदा, गुड़हल)
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दीपक, धूप, कपूर
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मिठाई, फल, नारियल, नींबू
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शराब या भोग (यदि परंपरा में अनुमत)
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भैरव जी का नाम स्मरण
🪔 काली पूजा विधि (Step-by-Step Guide)
1️⃣ स्नान और शुद्धि
सबसे पहले स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें।
घर के उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा स्थल तैयार करें।
2️⃣ माँ काली की मूर्ति स्थापना
माँ की मूर्ति या चित्र लाल कपड़े पर स्थापित करें।
नीचे अक्षत (चावल) बिछाएँ और दीपक जलाएँ।
3️⃣ संकल्प और ध्यान
पूजा प्रारंभ करने से पहले संकल्प लें:
“हे माँ काली, मुझमें साहस, शक्ति और विवेक का संचार करें।”
फिर 3 बार “ॐ क्रीं कालिकायै नमः” मंत्र का जाप करें।
4️⃣ अभिषेक और अर्पण
माँ को जल, दूध, शहद, इत्र और फूल अर्पित करें।
नींबू माला अर्पण करें और धूप दीप से आराधना करें।
5️⃣ मुख्य पूजा मंत्र
“ॐ क्रीं कालिकायै नमः”
“जय काली कालरात्रि, जय अघोर रूपिणी।”
इन मंत्रों का जाप 108 बार करें।
6️⃣ आरती और भोग
अंत में आरती करें —
“जय माँ काली, जय जय महाकाली…”
भोग में मिठाई, नारियल और नींबू अर्पित करें।
काली माँ की कथा
कथा के अनुसार, जब असुरों का अत्याचार बढ़ा, तब माँ दुर्गा के क्रोध से काली रूप प्रकट हुआ। उन्होंने राक्षसों का संहार किया, और जब उनके क्रोध को शांत करने के लिए भगवान शिव उनके चरणों में आए, तो उन्होंने अनजाने में उन पर पाँव रख दिए। यह देखकर माँ को अपने कार्य का बोध हुआ और उन्होंने अपनी जीभ बाहर निकाल ली — यह दृश्य ही आज माँ काली की मूर्ति में दिखाया जाता है।
“माँ काली बताती हैं — शक्ति का उपयोग केवल धर्म और रक्षा के लिए होना चाहिए, न कि विनाश के लिए।”
🕉️ माँ काली के प्रमुख मंत्र
1️⃣ “ॐ क्रीं कालिकायै नमः।”
2️⃣ “ॐ ऐं ह्रीं क्रीं चामुण्डायै विच्चे।”
3️⃣ “ॐ नमः कालरात्र्यै।”
4️⃣ “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं परमेश्वर्यै नमः।”
इन मंत्रों का रात्रि में जाप करने से भय, रोग और शत्रु नष्ट होते हैं।
🌕 काली पूजा 2025 क्यों है खास?
2025 की काली पूजा खास इसलिए है क्योंकि यह दीवाली और अमावस्या की रात्रि के साथ संयोजन में पड़ रही है। इस वर्ष ग्रहों की स्थिति में गुरु और चंद्रमा का शुभ योग रहेगा, जिससे साधना और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्ति का मार्ग खुलता है।
यह योग भक्तों को:
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आध्यात्मिक उन्नति
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मानसिक शांति
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और जीवन में साहस प्रदान करेगा।
⚠️ काली पूजा में ध्यान देने योग्य बातें
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पूजा के समय भय या नकारात्मक भावना न रखें।
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माँ को केवल लाल या काले फूल ही अर्पित करें।
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पूजा के दौरान किसी का अपमान न करें।
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माँ की मूर्ति के सामने झूठ न बोलें।
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पूजा समाप्ति के बाद प्रसाद ग्रहण करें और शांत मन से ध्यान करें।
🌺 काली पूजा के लाभ
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भय, रोग और संकट से मुक्ति
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आत्मबल, साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि
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घर में नकारात्मकता का नाश
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सफलता और मन की स्थिरता
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आध्यात्मिक जागृति
💫 आध्यात्मिक संदेश
माँ काली हमें सिखाती हैं कि जीवन में जो अंधकार है — वह भय, असत्य और लोभ का परिणाम है। जब हम सच्चे मन से उनकी आराधना करते हैं, तो वह अंधकार मिटाकर हमें प्रकाश और शक्ति का मार्ग दिखाती हैं।
“माँ काली भयंकर नहीं — वे भक्ति की सबसे गहरी शांति हैं।”
❓ काली पूजा 2025 FAQs
1️⃣ काली पूजा 2025 कब है?
👉 26 अक्टूबर 2025, रविवार की रात्रि को।
2️⃣ काली पूजा का समय क्या है?
👉 रात 11:15 बजे से 12:40 बजे तक (निशीथ काल)।
3️⃣ काली पूजा कहाँ सबसे अधिक मनाई जाती है?
👉 पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा, बिहार और नेपाल में।
4️⃣ माँ काली की आरती कौन-सी है?
👉 “जय माँ काली, जय महाकाली…” सबसे प्रसिद्ध आरती है।
5️⃣ क्या महिलाएँ काली पूजा कर सकती हैं?
👉 हाँ, श्रद्धा और शुद्ध मन से कोई भी पूजा कर सकता है।
6️⃣ काली पूजा में क्या भोग लगाया जाता है?
👉 मिठाई, नारियल, नींबू, और परंपरा अनुसार मदिरा।
7️⃣ क्या काली पूजा और दीपावली एक दिन होती है?
👉 हाँ, अधिकांश वर्षों में दोनों एक साथ मनाई जाती हैं।
8️⃣ काली माँ का प्रिय रंग कौन-सा है?
👉 लाल और काला रंग माँ काली को अत्यंत प्रिय है।
9️⃣ काली पूजा से क्या लाभ होता है?
👉 भय और नकारात्मकता से मुक्ति, आत्मबल की वृद्धि।
10️⃣ माँ काली की कृपा कैसे प्राप्त करें?
👉 प्रतिदिन “ॐ क्रीं कालिकायै नमः” का जाप करें और सत्य का पालन करें।
निष्कर्ष
काली पूजा 2025 केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह आत्मबल और आत्मज्ञान का पर्व है। इस वर्ष जब दीपावली की रात माँ काली की आराधना करें, तो अपने भीतर के भय को मिटाकर सत्य और शक्ति का दीप जलाएँ।
“जय माँ काली, जय महाशक्ति!”



